नेशनल डेस्क : हजारों किलोमीटर दूर वेनेजुएला में आए विनाशकारी भूकंप ने भारत के ऊर्जा क्षेत्र और तेल आपूर्ति को लेकर नई चिंता पैदा कर दी है। ऐसे समय में जब भारत कच्चे तेल के लिए नए स्रोतों पर तेजी से निर्भरता बढ़ा रहा था, इस प्राकृतिक आपदा ने सप्लाई चेन पर असर पड़ने की आशंका बढ़ा दी है।
मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और समुद्री मार्गों पर अनिश्चितता के बीच भारत ने हाल के महीनों में वेनेजुएला से कच्चे तेल की खरीद बढ़ाई थी। लेकिन अब वहां आई आपदा के कारण तेल आपूर्ति की रफ्तार प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
भारत के लिए क्यों अहम बन गया था वेनेजुएला?
हाल के महीनों में वैश्विक हालात को देखते हुए भारतीय रिफाइनरी कंपनियों ने वैकल्पिक स्रोतों की ओर रुख किया था। इसी दौरान वेनेजुएला से कच्चे तेल का आयात तेजी से बढ़ा और यह भारत के लिए महत्वपूर्ण आपूर्तिकर्ताओं में शामिल हो गया।
मिडिल ईस्ट में आपूर्ति संबंधी चुनौतियों के बीच यह बदलाव भारत के लिए रणनीतिक रूप से अहम माना जा रहा था।
भूकंप के बाद कहां बढ़ी चिंता?
रिपोर्ट के अनुसार भूकंप के बाद बिजली आपूर्ति बाधित होने, परिवहन व्यवस्था प्रभावित होने और कुछ बंदरगाहों पर आपातकालीन प्रतिबंध लागू होने की आशंका जताई गई है।
भले ही तेल निर्यात ढांचा सीधे प्रभावित न हुआ हो, लेकिन लॉजिस्टिक्स और माल ढुलाई की गति धीमी पड़ने से सप्लाई में देरी हो सकती है। इससे जहाजों की आवाजाही और शिपमेंट समय पर असर पड़ सकता है।
क्या बढ़ जाएंगे पेट्रोल-डीजल के दाम?
इस सवाल का फिलहाल सीधा जवाब नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल भूकंप आने भर से पेट्रोल और डीजल की कीमतें तुरंत नहीं बढ़तीं।
लेकिन यदि लंबे समय तक तेल लोडिंग, शिपिंग और आपूर्ति बाधित रहती है तो अतिरिक्त लागत जुड़ सकती है। जहाजों के इंतजार का समय बढ़ने, वैकल्पिक रूट अपनाने और परिचालन खर्च बढ़ने का असर आगे चलकर तेल कंपनियों की लागत पर पड़ सकता है।
हालांकि तत्काल खुदरा ईंधन कीमतों में बदलाव की स्थिति नहीं मानी जा रही।
शिपिंग और बीमा सेक्टर पर भी असर की आशंका
विशेषज्ञों का कहना है कि अब तेल आपूर्ति मार्गों के आकलन में केवल भू-राजनीतिक जोखिम नहीं बल्कि प्राकृतिक आपदाओं को भी गंभीर कारक माना जा रहा है।
यदि बंदरगाह संचालन और परिवहन नेटवर्क लंबे समय तक प्रभावित रहते हैं तो शिपिंग और बीमा लागत में भी बढ़ोतरी संभव मानी जा रही है।
भारत के निवेश पर भी पड़ सकता है असर
भारत की सरकारी ऊर्जा कंपनी ने भी वेनेजुएला की तेल परियोजनाओं में निवेश किया हुआ है। ऐसे में यदि उत्पादन या निर्यात लंबे समय तक प्रभावित रहता है तो इसका असर आर्थिक और परिचालन स्तर पर भी देखने को मिल सकता है।
हाल ही में दोनों देशों के बीच ऊर्जा, खनिज, दवा और ऑटोमोबाइल क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने को लेकर चर्चा भी हुई थी। ऐसे में बदलते हालात आगे की योजनाओं को प्रभावित कर सकते हैं।
फिलहाल क्या समझें आम लोग?
फिलहाल बाजार की नजर इस बात पर है कि वेनेजुएला में आपूर्ति व्यवस्था कितनी जल्दी सामान्य होती है। यदि बाधाएं सीमित समय तक रहती हैं तो आम उपभोक्ताओं पर असर कम रह सकता है, लेकिन लंबे व्यवधान की स्थिति में वैश्विक तेल बाजार पर दबाव बढ़ सकता है।
